रविवार, 1 अप्रैल 2018

आज का विचार 

किसी का किया एहसान कभी भूलो मत और अपना किया एहसान कभी याद मत करो!

शुक्रवार, 30 मार्च 2018

आज का विचार 

मनुष्य पुण्य का फल सुख चाहता है, पर पुण्य करना नहीं चाहता और पाप का फल दुःख नहीं चाहता पर पाप छोड़ना नहीं चाहता इसीलिए सुख मिलता नहीं है और दुःख भोगना पड़ता है।

गुरुवार, 29 मार्च 2018

आज का विचार 

हर व्यक्ति मुझसे किसी न किसी बात में बेहतर होता है और मैं उसी से वह बात सीख लेता हूँ !

बुधवार, 28 मार्च 2018

आज का विचार 

सच बोलना तो दूर रहा, आजकल लोग सच सुनना भी पसंद नहीं करते!

मंगलवार, 27 मार्च 2018

आज का विचार 

दूसरों की परेशानी का आनंद ना लें! कही भगवान आपको वही गिफ्ट ना कर दें, क्योंकि भगवान वही देता है, जिसमें आपको आनंद मिलता है!

सोमवार, 26 मार्च 2018


आज का विचार 


                जीवन में यही देखना महत्वपूर्ण नहीं है कि कौन हमसे आगे है या कौन पीछे!                   यह भी देखना चाहिए कि कौन हमारे साथ है और हम किसके साथ!

रविवार, 25 मार्च 2018

आज का विचार 

दूसरों के द्वारा तुम अपना आदर चाहते हो तो पहले दूसरों का आदर करों। जिंदगी काँटों का सफर है, हौंसला इसकी पहचान है, रास्‍ते पर तो सभी चलते हैं, जो रास्‍ते बनाए वही इंसान है।

शनिवार, 24 मार्च 2018


आज का विचार 

जब तुम पैदा हुए थे तो तुम रोए थे, जबकि पूरी दुनिया ने जश्न मनाया था अपना 

जीवन ऐसे जियो कि तुम्हारी मौत पर पूरी दुनिया रोए और तुम जश्न मनाओ

गुरुवार, 22 मार्च 2018

आज का विचार 

इंसान तो हर घर में पैदा होते हैं!
बस इंसानियत कहीं कहीं जन्म लेती है!

मंगलवार, 20 मार्च 2018


आज का विचार 

जब इंसान की जरूरत बदल जाती है, तो उसका आपसे बात करने का तरीका भी बदल जाता है!

सोमवार, 19 मार्च 2018


आज का विचार 

              मुझे पता नही पाप और पुण्य क्या है! बस इतना पता है जिस कार्य से किसी का                दिल दुखे वो पाप और जिस कार्य से किसी के चेहरे पे मुस्कान आये वो पुण्य!

रविवार, 18 मार्च 2018

आज का विचार 

बात करने का मजा तो उन लोगों के साथ आता है, 

जिनके साथ बोलने से पहले कुछ सोचना न पड़ें!

बुधवार, 14 मार्च 2018

आज का विचार 

‘घमंड’ और ‘पेट’ जब ये दोनों बढ़तें हैं…तब ‘इन्सान’ चाह कर भी किसी को गले नहीं लगा सकता.. जिस प्रकार नींबू के रस की एक बूंद हजारों लीटर दूध को बर्बाद कर देती है उसी प्रकार ‘मनुष्य’ का ‘अहंकार’ भी अच्छे से अच्छे संबंधों को बर्बाद कर देता है!

मंगलवार, 13 मार्च 2018

आज का विचार 

ए ज़िन्दगी;
मुश्किलों के सदा हल दे,
थक न सकें हम;
फुर्सत के कुछ पल दे,
दुआ है दिल से
सबको सुखद आज
और बेहतर कल दे ।

सोमवार, 12 मार्च 2018

आज का विचार 

ईश्वर हमें कभी सजा नहीं देते, हमारे कर्म ही हमें सजा देते हैं!

रविवार, 11 मार्च 2018


आज का विचार 

हे ईश्वर मुझे अधिक लेने के लिए नहीं, अधिक देने के योग्‍य बनाओ…

शुक्रवार, 9 मार्च 2018

आज का विचार 


दूसरों के काम बिगाड़ने वाले लोग एक ढूढ़ने पर हजारों मिल जाते हैं, 

  लेकिन दूसरों के काम बनाने वाला हजारों में कोई एक होता है!

गुरुवार, 8 मार्च 2018

केंद्र सरकार द्वारा लेबर कोड का ड्राफ्ट तैयार 
अब पीएफ और पेंशन के लिए कर्मचारी स्वयं करा सकेंगे रजिस्ट्रेशन


केंद्र सरकार द्वारा लेबर कोड ऑन सोशल सिक्‍युरिटी, 2018 के अंर्तगत कर्मचारियों को विशेष सुविधा मुहैया कराई जाएगी। इसके तहत अब पीएफ (प्रॉविडेंट फंड) और पेंशन सहित सोशल सिक्‍युरिटी के लिए कामगारों को कंपनी के रहमोकरम को निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। कंपनी द्वारा अगर एक निश्चित समय-सीमा के अंदर पीएफ और पेंशन के लिए रजिस्‍ट्रेशन नहीं कराया जाता, तो कर्मचारी अपने आप अपना रजिस्‍ट्रेशन करा सकेगा। इम्‍पलॉयर का कंट्रीब्‍यूशन वेज सीलिंग पर आधारित होगा। केंद्र सरकार 31 मार्च के बाद इस डील को अंतिम रूप देगी। डील के अनुसार, कर्मचारियों को सोशल सिक्‍योरिटी मुहैया कराने के लिए इम्‍पलॉयर कंट्रीब्‍यूशन कितना होगा यह सरकार तय करेगी, परंतु यह मासिक आय का 17.5 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा। वहीं एम्‍पलॉयर कंट्रीब्‍यूशन के लिए मंथली इनकम का पैमाना वेज सीलिंग होगी अर्थात् मंथली इनकम वेज सीलिंग तक ही हो सकती है। यानी अगर वेज सीलिंग 15,000 रुपए है तो कर्मचारी की मंथली इनकम 15,000 रुपए से अधिक नहीं हो सकती।

डील में कहा गया है कि सोशल सिक्‍योरिटी के लिए इम्‍पलाई कंट्रीब्‍यूशन की अधिकतम लिमिट 12.5 फीसदी होगी तो वहीं अगर इप्‍लाई क्‍लास चैथी कैटेगरी में आता है, तो उसका कंट्रीब्‍यूशन शून्‍य होगा। ऐसे मामलों में एम्‍पलॉयर से मात्र सिंगल कंट्रीब्‍यूशन कलेक्‍ट किया जाएगा। यदि एम्‍पलॉयर से किसी तरह का सेस यानी उपकर वसूला जा रहा है, तो उसके लिए एम्‍पलॉयर कंट्रीब्‍यूशन की दर कम भी हो सकती है। इसी तरह कोई कंपनी या संस्‍थान अगर ओएसएच स्‍टैंडर्ड के ऊंचे मानकों को मेनेटेन करता है, तो उस संस्‍थान या कंपनी के लिए भी एम्‍पलॉयर कंट्रीब्‍यूशन की दर कम हो सकती है। ओएसएच स्‍टैंडर्ड का अर्थ है-ऑक्‍यूपेशनल सेफ्टी और हेल्‍थ। यानि आप जहां पर काम करते हैं वहां आपकी और आपके स्‍वास्‍थ्‍य की सुरक्षा के लिए कैसा वातावरण है।

डील में यह भी कहा गया कि जिन संस्‍थानों में ग्रेच्‍युटी पेमेंट एक्‍ट लागू होता है उनमें एम्‍पलॉयर्स को वेज यानी वेतन का 2 फीसदी ग्रेच्‍युटी फंड में कंट्रीब्‍यूट करना होगा। अगर कोई वर्कर कांट्रैक्‍ट पर काम कर रहा है तो उस केस में ग्रेच्‍युटी कंट्रीब्‍यूशन के लिए प्रिंसिपल इम्‍पलॉयर जिम्‍मेदार होगा। ग्रेच्‍युटी फंड प्रिसिपल इम्‍पलॉयर के नाम से मेनेटेन किया जाएगा न कि इंडीविजुअल कर्मचारी के नाम पर।

वर्तमान व्यवस्था में केवल संगठित क्षेत्र में काम करने वाले कामगारों को ही ईपीएफ एक्‍ट के तहत पीएफ और पेंशन की सुविधा दी जाती है। ईपीएफ कानून में आने वाली कंपनियां अथवा संस्‍थान अपने कर्मचारियों का पीएफ और पेंशन अकाउंट खुलवाते हैं। अगर कोई कंपनी ऐसा नहीं करती, तो उसके विरुद्ध कानूनी कार्रवाही का प्रावधान है, किंतु वर्कर्स खुद को पीएफ और पेशन के लिए ईपीएफओ के पास रजिस्‍टर नहीं करा सकते।
केंद्र सरकार द्वारा लेबर कोड ऑन सोशल सिक्‍योरिटी, 2018 के मसौदे को तैयार कर लिया गया है। फिलहाल इस मसौदे पर स्‍टेकहोल्‍डर्स के सुझाव आमंत्रित की गए हैं। सुझाव आने के बाद केंद्र सरकार इसे संसद में प्रस्तुत करेगी। सरकार का लक्ष्य है-लेबर कोड के अंर्तगत 50 करोड़ कर्मचारियों को सोशल सिक्‍युरिटी उपलब्ध कराना।
अभी इम्‍प्लॉई का रजिस्‍ट्रेशन कराने का उत्तरदायित्व इम्‍प्लॉयर का है। कोड के मसौदे में भी सोशल सिक्‍युरिटी के लिए इम्‍प्लॉई का रजिस्ट्रेशन कराने की जिम्‍मेदारी इम्‍प्लॉयर (कंपनी) की है, लेकिन कोई कंपनी यदि किसी कर्मचारी का एक निश्चित समय सीमा के अंदर सोशल सिक्‍युरिटी के लिए रजिस्‍ट्रेशन नहीं कराती, तो उस पर पेनाल्‍टी लगेगी। साथ ही कर्मचारी (इम्‍प्लॉई) को यह सुविधा दी जाएगी कि वह कोड के तहत स्वयं की सोशल सिक्‍युरिटी के लिए पंजीकरण (रजिस्‍ट्रेशन) करा सके। इस सुविधा का लाभ संगठित ओर गैर-संगठित दोनों क्षेत्र के कर्मचारियों उठा सकेंगे।

लेबर कोड के मसौदे के अंतर्गत एक यूनिवर्सल रजिस्‍ट्रेशन सिस्‍टम तैयार किया जाएगा। इस सिस्‍टम अथवा प्रणाली में सभी सक्रिय या एक्टिव वर्कर्स का रजिस्‍ट्रेशन सुनिश्चित होगा। रजिस्‍ट्रेशन आधार कार्ड पर आधारित होगा। रजिस्‍ट्रेशन के नियमों को सेंट्रल बोर्ड निर्धारित करेगा। इसके अतिरिक्त, फील्‍ड में रजिस्‍ट्रेशन का काम लोकल बॉडीज जैसे ग्राम पंचायत तथा म्‍युनिसिपल बॉडीज करेंगी। यह भी व्यवस्था रहेगी कि स्‍टेट बोर्ड वर्कर्स को रजिस्‍ट्रेशन की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए फैसिलिटेशन सेंटर का लाभ दिया जाएं। यह प्रणाली सार्वजनिक-निजी भागीदारी यानि प्राइवेट-पब्लिक पार्टनरशिप-पीपीपी मॉडल पर भी आधारित हो सकेगा।

आज का विचार 

अक्‍लमंद इत्र के डिब्‍बे के समान है, जो चुप रहता है लेकिन गुण दिखाता है। 

मूर्ख नट के ढोल के समान है, जो शोर बहुत करता है, पर भीतर से पोला है।

बुधवार, 7 मार्च 2018


आज का विचार 

जीवन में इतना तो संघर्ष कर ही लेना चाहिए कि अपने बच्चे का 

आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए दूसरों का उदाहरण न देना पड़े!

मंगलवार, 6 मार्च 2018


आज का विचार 

दिल की बात साफ-साफ कह देनी चाहिए, 

क्योंकि बता देने से फैसले होते है और न बताने से फासले!

सोमवार, 5 मार्च 2018

आज का विचार 

जो मानव अपनी निंदा सुन लेता है, वह सारे जगत पर विजय प्राप्त कर लेता है!

रविवार, 4 मार्च 2018

आज का विचार 

आदर करो उसका जिसने अपनी व्यस्तता में आपके लिए समय निकाला हो, परंतु प्यार करो उसको जिसने अपनी व्यस्तता को नहीं देखा जब आपको ज़रूरत थी उनकी!

बुधवार, 28 फ़रवरी 2018


आज का विचार 

जो तुम्हारे मौन का अर्थ नहीं समझता वह सम्भवतः तुम्हारे शब्दों का अर्थ भी नहीं समझेगा!

मंगलवार, 27 फ़रवरी 2018



ईमानदारी आपकी बातों के साथ-साथ आपके काम में भी दिखनी चाहिए! जीवन के हर क्षेत्र में सफल होने के लिए ईमानदारी और सत्यनिष्ठा बहुत ही आवश्यक हैं और सबसे अच्छी बात ये हैं कि इन दोनाें गुणों को
कोई भी व्यक्ति अपने अंदर विकसित कर सकता है!

सोमवार, 26 फ़रवरी 2018

आज का विचार 

जितने अच्छे से आप दूसरों से, दूसरों की स्त्रियों से
दूसरों के माँ-बाप से दूसरों के बच्चों से बात करते हैं,
उतने ही अच्छे से यदि अपनों से बात करने लगे तो
घर में ही स्वर्ग उतर आयेगा!

रविवार, 25 फ़रवरी 2018


आज का विचार 

कभी पीठ पीछे आपकी बात चले, तो घबराना मत, 
क्योंकि बात तो उन्ही की होती है, जिनमें कोई बात होती है!

गुरुवार, 22 फ़रवरी 2018


आज का विचार 

भीड़ हमेशा उस रास्ते पर चलती है, 

जो रास्ता आसान लगता है, लेकिन इसका ये मतलब नहीं 

कि भीड़ हमेशा सही रास्ते पर ही चलती है! 

अपने रास्ते खुद चुनिए क्योंकि 

आपको आपसे बेहतर और कोई नहीं जानता!

    आज का विचार 

                                          जिंदगी चाहे एक दिन की हो या चार दिन की,                                              उसे ऐसे जियो जैसे जिंदगी तुम्हें नहीं जिंदगी को तुम मिले हो!

मंगलवार, 20 फ़रवरी 2018

आज का विचार 

खुशी उनको नहीं मिलती जो अपनी शर्तो पे जिंदगी जिया करते हैं।
खुशी उनको मिलती है, जो दूसरों की खुशी के लिए अपनी शर्ते बदल लिया करते हैं।

सोमवार, 19 फ़रवरी 2018

आज का विचार 

उबाल इतना भी ना हो कि खून सूख कर उड़ जाए…
धैर्य इतना भी ना हो कि खून जमे तो खौल भी ना पाएं।

रविवार, 18 फ़रवरी 2018

आज का विचार 


इतनी मेहरबानी मेरे ईश्‍वर बनाये रखना, जो रास्‍ता सही हो] उसी पर चलाये रखना, ना दुखे दिल किसी का मेरे शब्‍दों से, इतनी कृपा मेरे ऊपर बनाये रखना।

शुक्रवार, 16 फ़रवरी 2018

आज का विचार 

अच्‍छे इंसान की सबसे पहली और सबसे आखिरी निशानी ये है कि वो उन लोगों की भी इज्‍जत करता है, जिनसे उसे किसी किस्‍म के फायदे की उम्‍मीद नहीं होती ।

गुरुवार, 15 फ़रवरी 2018


आज का विचार 

जो लोग मन में उतरते हैं, उन्‍हें संभाल कर रखिए 
और जो मन से उतरते हैं, उनसे संभल कर रहिए।

बुधवार, 14 फ़रवरी 2018

आज का विचार 

“पैसा” मानव इतिहास की सबसे खराब खोज है, 

लेकिन मनुष्य के ‘चरित्र” को परखने की सबसे विश्वसनीय सामग्री है!

सोमवार, 12 फ़रवरी 2018

आज का विचार 

स्वार्थी इंसान को छोड़ देना चाहिए, क्योंकि उसमें सुधार की गुंजाइश न के बराबर होती है!

रविवार, 11 फ़रवरी 2018

आज का विचार 

किसी को गलत समझने से पहले एक बार उसके हालात समझने की कोशिश जरूर करना।

शनिवार, 10 फ़रवरी 2018

शिक्षा के क्षेत्र में हो रहा है सकारात्मक सुधार
नवयुवक बन रहे अब काम के लायक


भारतीय शिक्षा पद्धति पर प्रायः सवाल उठाएं जाते रहे हैं, जिसके निचोड़ की बात करें तो हम पाएंगे कि समय-समय पर शिकायत मिलती रही है कि विश्वविद्यालय से निकले स्नातक काम पर रखने लायक नहीं हैं। इस बारे में श्री रतन टाटा ने भी इंजीनियर्स के लिए कहा था कि उनमें अधिकांश रोजगार के लिए अपेक्षित पात्रता नहीं रखते। इस धारणा के विपरीत हाल ही में प्रतिष्ठित संस्थाओं ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन, कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्रीज और यूनाइटेड नेशंस डिवेलपमेंट प्रोग्राम के साथ-साथ दो स्वतंत्र एजंसियों पीपलस्ट्रांग और वीबॉक्स के संयुक्त सर्वेक्षण से यह बात निकलकर आई है कि गत कुछ वर्षों में भारत के नए स्नातकों में रोजगार योग्यता में ठीक-ठाक ढंग से सुधार आया है।

120 कंपनियों और 510,000 छात्रों पर हुए इस सर्वेक्षण के सकारात्मक नतीजे बताते हैं कि शिक्षा प्रणाली और नवयुवकों के स्किल में पहले की अपेक्षाकृत अच्छा सुधार देखने को मिला है। रोजगार योग्यता अथवा नियोजनीयता मैनेजमेंट अवधारणा को हाल ही में शामिल किया गया है। वर्ष 1997 में सुमंत्र घोषाल ने इसे सर्वप्रथम प्रस्तुत किया, जिसका अर्थ है मूल्य उत्पादक कार्य करके धन कमाना और काम करते हुए अपनी क्षमताओं या निपुणता में वृद्धि करना ताकि भविष्य में अधिक बेहतर संभावनाओं को तलाशा जा सके।

हमारे देश में तकनीकी शिक्षा के अलावा दूसरे क्षेत्रों को इस दायरे से बाहर रखा जाता था। दूसरे अर्थों में कहे तो स्नातक सरकारी नौकरियों के लिए चाहे अच्छे से फिट हो जाते हैं, किंतु उत्पादक कार्यों के लिए वे उपयोगी नहीं होते। हाल में आया सर्वेक्षण इसके उल्ट यह प्रदर्शित करता है कि फिलहाल ऐसे में स्नातकों में कॉरपोरेट नौकरियों के लिए योग्यता पैदा हुई है।

गत वर्ष की अपेक्षा इस साल इसमें काफी वृद्धि देखी गई है जैसेकि इंजीनियरिंग क्षेत्र में रोजगार क्षमता 2016-17 में 50.69 प्रतिशत थी, जोकि 2017-18 में 51.52 प्रतिशत हो गई। फार्मास्युटिकल्स में गत वर्ष 42.3 फीसदी रहने वाली रोजगार क्षमता इस साल 47.78 प्रतिशत हो गई। कंप्यूटर ऐप्लिकेशंस में आश्चर्यजनक तरीके से यह क्षमता 31.36 प्रतिशत से बढ़कर 43.85 फीसदी तक हो गई। बीए में 35.66 फीसदी रहे वाली रोजगार क्षमता इस वर्ष 37.39 प्रतिशत हो गई। वहीं दूसरी ओर 2014 से शुरू उछाल पर रही एमबीए और बीकॉम की रोजगार योग्यता (34 प्रतिशत से 46 प्रतिशत पर पहुंच गई थी) में गिरावट दर्ज की गई। मोटा मोटी देखे तो यह निकलकर आया कि प्रत्येक दो नए स्नातकों में से एक को रोजगार दिया जा सकता है। इंजीनियरों के रोजगार में भी 52 प्रतिशत रोजगार लायक पाएं गए हैं। सर्वाधिक योग्य कंप्यूटर साइंस विद्यार्थी माने गए।

सर्वेक्षणकर्ताओं की माने तो अनेक संस्थानों ने बदलते समय की नब्ज के हिसाब से अपने कोर्सों को बदला है, इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार लाया है और अपने छात्रों को रोजगार दक्ष बनाने के लिए लीक से हटकर प्रयत्न किए हैं। ऐसे में, सरकार के समक्ष एक नई चुनौती आ खड़ी हुई है, चूंकि दक्ष कर्मचारी बेरोजगारी को सरलता से सहन नहीं कर पाएगे।

शुक्रवार, 9 फ़रवरी 2018

आज का विचार 

चरित्र अगर कपड़ों से तय होता, तो कपड़ों की दुकान मंदिर कहलाती!

आईटीआर स्क्रूटनी के समय अब करदाताओं से 
5 सवाल से ज्यादा नहीं पूछ पाएंगे आयकर अधिकारी 


विश्वसनीय सूत्रों की माने तो अब आयकर विभाग ने आयकर रिटर्न स्क्रूटनी के समय करदाताओं से पूछे जाने वाले प्रश्नों की प्रक्रिया में परिवर्तन किया है। अब कोई भी अधिकारी करदाताओं से 5 से अधिक प्रश्न नहीं पूछ पाएंगे। यहां तक प्रश्न क्या होंगे यह भी आयकर विभाग अधिकारी नहीं, वरन् विभाग निश्चित करेगा। अब सरकार ई-असेसमेंट और ई -स्‍क्रूटनी लागू करने कर सकती है।

नई प्रक्रिया का उद्देश्य
आयकर दाताओं और आयकर अधिकारी के बीच सीधे संपर्क को कम करना। प्रायः शिकायतें मिलती थीं कि अधिकारी करदाताओं को धमकाते एवं परेशान करते हैं। 
एक वरिष्ठ अधिकारी की माने तो अब सब ऑनलाइन होगा। अधिकारी टैक्स स्क्रूटनी से जुड़े प्रश्न टैक्सपेयर्स को ऑनलाइन ही भेज  सकेगा। ये सवाल 5 से ज्यादा नहीं होंगे। 

अब तक होती थी यह प्रक्रिया
आयकर अधिकारी किसी भी आयकरदाता को टैक्स स्क्रूटनी के नाम पर बुलाकर अनेक पेपर और जानकारी मांगते थे। ऑफिस के अनेक चक्कर लगवाते थे। 

नहीं लगेगी टैक्स चोरी पर लगाम 
आयकर विभाग के एक अधिकारी का कहना है कि सभी फील्ड पर काम करने वाले अधिकारी को आदेश दिए गए हैं कि आयकरदाताओं को परेशान न किया जाए। सीधे करदाताओं के पास जाकर उसकी आय और टैक्‍स प्रोफाइल के बारे में पूछताछ अथवा सर्वे न करें। इससे करदाताओं का एक बड़ा वर्ग जो अपनी आय के हिसाब से कर नहीं देता है, उसका डर खत्‍म हो जाएगा और टैक्‍स की चोरी पर अंकुश नहीं लग पाएगा।

अधिकारी की माने तो अगर किसी बाजार में एक दुकानदार के यहां आयकर विभाग अधिकारी सर्वे करते हैं तो पूरे बाजार के दुकानदारों पर इसका असर होता है और वे टैक्‍स नियमों का पालन करते हैं, परंतु अब कहा जा रहा है कि आपको दुकानदार के पास जाने की जरूरत नहीं है।

पूरे देश में लागू होगा ई -असेसेमेंट 
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बजट 2018-19 भाषण में कहा गया था कि हम देशभर में ई -असेममेंट लागू करने के लिए तैयार हैं। केंद्र ने 2016 में पायलट बेसिस पर ई-असेसमेंट लागू किया था। 2017 में इसे बढ़ा कर 102 शहरों में कर दिया गया था। अब इनकम टैक्‍स विभाग ने ई-असेसमेंट प्रक्रिया पूरे देश में लागू करने का फैसला किया है। इसके तहत असेसमेंट की पूरी प्रकिया ऑनलाइन होगी और टैक्‍सपेयर्स और असेसिंग ऑफीसर के बीच संपर्क की जरूरत नहीं होगी।

टैक्‍स नेट में आए 8 करोड़ टैक्‍सपेयर्स 
सुशील चंद्रा (चेयरमैन, सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्‍ट टैक्‍सेज अर्थात् सीबीडीटी) ने हाल में दावा किया है कि देश में टैक्‍सबेस 8 करोड़ तक पहुंच गया है अर्थात् 8 करोड़ टैक्‍सपेयर्स आयकर रिटर्न फाइल कर रहे हैं। ऐसा डायरेक्‍ट टैक्‍सेज के क्षेत्र में केंद्र सरकार द्वारा बड़े पैमाने पर सुधारों को लागू करने से हुआ है। 

गुरुवार, 8 फ़रवरी 2018

आज का विचार 

मनुष्य कितना भी गोरा क्यों ना हो परंतु उसकी परछाई सदैव काली होती है…“मैं श्रेष्ठ हूँ”  यह आत्मविश्वास है, लेकिन “सिर्फ मैं ही श्रेष्ठ हूँ”  यह अहंकार है…”
इच्छा पूरी नहीं होती तो क्रोध बढ़ता है, और इच्छा पूरी होती है तो लोभ बढ़ता है। इसलिये जीवन की हर स्थिति में धैर्य बनाये रखना ही श्रेष्ठता है।

मंगलवार, 6 फ़रवरी 2018

आज का विचार 

दुखी सब है संसार में कौन है जो सुखी है,
किसी को अपना दुख दर्द देता है
तो किसी को दूसरों का सुख दर्द देता है!

सोमवार, 5 फ़रवरी 2018

आज का विचार 

परिस्थितियां जब विपरीत होती है,
तब व्यक्ति का ‘‘प्रभाव और पैसा’’
नहीं ‘‘स्वभाव और संबंध’’ काम आते हैं!

रविवार, 4 फ़रवरी 2018

आज का विचार 

किसी की बुराई तलाश करने वाले इंसान की मिसाल उस मक्‍खी की तरह है जो सारे खूबसूरत जिस्‍म को छोड़कर केवल जख्‍म पर ही बैठती है!!

गुरुवार, 1 फ़रवरी 2018

आज का विचार 

जरूरत से ज्यादा मिले उसको कहते है नसीब,
भगवान का दिया सब कुछ है!

फिर भी रोता है उसे कहते है बदनसीब,
और कुछ भी ना होकर भी खुश रहता है!

उसको कहते है खुशनसीब ख्वाईश मनुष्य को जीने नहीं देती,
और मनुष्य ख्वाईश को मरने नहीं देता!

बुधवार, 31 जनवरी 2018


आज का विचार 

एक बेहतरीन जिंदगी जीने के लिए
यह स्‍वीकार करना भी जरूरी है
कि सब कुछ सबको नहीं मिल सकता।

मंगलवार, 30 जनवरी 2018

आज का विचार 

मनुष्‍य को उसके कर्म ही दण्डित करते है और उसके कर्म ही उसे पुरस्‍कृत करते है,
मनुष्‍य व्‍यर्थ ही ईश्‍वर को अपने दुखों का दोषी ठहराता है।
व्‍यक्ति अकेले पैदा होता है और अकेले मर जाता है, 
और वो अपने अच्‍छे और बुरे कर्मो का फल खुद ही भुगतता है।

सोमवार, 29 जनवरी 2018

विकास से रूक रही
 पर्यावरण संरक्षण की राह 


विकास की जरूरत देश एवं नागरिकों सभी को है, लेकिन पर्यावरण को नुकसान पहुंचाकर इसे पाना सभी के लिए घातक है। यह बातें हम वर्षों से सुनते आ रहे हैं, लेकिन हमने कभी भी इनपर अमल कर पर्यावरण मित्र बनने का प्रयास नही किया। यही वजह है कि बरसात के समय बरसात नहीं होती, तो गर्मी में गर्मी बेहिसाब पड़ती है और अब तो सर्दी का भी यह अलाम है कि समय के पहले या बाद आती हड़ कंपकंपा देने वाली सर्दी पड़ रही है। आपको बता दें कि वर्ष 1901 के बाद से इस वर्ष की जनवरी सबसे सूखी और कम बारिश वाली होगी। यानि यह जनवरी 117 वर्ष के इतिहास में सबसे ड्राई जनवरी साबित हो सकती है।

मौसम का रेकॉर्ड रखने की व्यवस्था 1901 में शुरू हुई। इसके बाद से यह सबसे सूखी जनवरी सिद्ध होती दिख रही है। 24 जनवरी तक देश में औसत मात्र 2.2 मिलीमीटर बारिश ही हुई है, जबकि जनवरी माह में भारत में सामान्य तौर पर 19.2 मिमी बारिश का औसत रहा है। इससे पहले वर्ष 2007 में केवल 2.8 मिमी बारिश रेकॉर्ड हुई थी। महत्ववूर्ण बात यह है कि जनवरी महीने में होने वाली बारिश न सिर्फ रबी की फसल के लिए उपयोगी होती है, बल्कि जल स्रोतों के रिचार्ज, ग्राउंडवॉटर और पर्वतीय ग्लेशियरों के लिए भी महत्वपूर्ण होती है। साथ ही शीत ऋतु की वर्षा प्रदूषण को कम करने में भी बड़ी भूमिका निभाती है। चूंकि सर्दियों में पारा गिरने और हवा की गति कम होने से प्रदूषण स्तर बढ़ता है। ऐसे में बारिश का न होना समस्या को गंभीर बना सकता है।

इतना ही नहीं हाल ही में देश की पर्यावरण स्थिति पर कड़ा प्रहार किया गया है एन्वायरनमेंटल परफॉर्मेंस इंडेक्स (ईपीआई) की ताजा रपट में। दावोस में वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम की बैठक में जारी की हुई इस वार्षिक रिपोर्ट से पता चलता है कि भारत इस मामले में संसार के चार सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले देशों में खड़ा है। 180 देशों की इस सूची में भारत को 177 वां स्थान मिल पाया है। विशेष तथ्य यह है कि भारत की यह गिरावट बिल्कुल नई है। जहां दो वर्ष पूर्व हम इसी सूची में 141वें स्थान पर थे। दो वर्षों में 36 अंक नीचे लुढ़कना सहज और स्वाभाविक गिरावट को साबित नहीं करता।

विचार करने योग्य बात है कि इस दो वर्षों में ऐसा क्या हुआ है, जिससे हमारे देश के पर्यावरण पर इतना बुरा प्रभाव पड़ा। सबसे पहले तो इसकी जड़ में पर्यावरण मंत्रालय की कार्यशैली में हुआ बदलाव है। यूपीए सरकार में पर्यावरण मंत्रालय बेहद सक्रिय था। वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से किसी औद्योगिक प्रॉजेक्ट्स को मंजूरी मिलना आसान नहीं था। अक्सर शिकायतें की जाती थीं कि पर्यावरण मंत्रालय विकास की गति को अवरूद्ध कर रहा है। इसे मंत्रियों की मनमानी व संतरियों के भ्रष्ट से भी जोड़ दिया जाता था। वर्तमान सरकार बदलने के बाद विकास को गति दी गई। प्रक्रिया में बदलाव हुआ। पर्यावरण मंत्रालय की स्वीकृति एक औपचारिकता बनकर रह गई।

निश्चित रूप से विकासशील देशों की श्रेणी में शामिल हमारे देश में तीव्र एवं रोजगारपरक विकास की जरूरत हैं, लेकिन प्राकृतिक संपदा को नुकसान पहुंचाए बिना। इसके लिए पर्यावरण संरक्षण को विशेष तरजीह देने की जरूरत है। हमें प्राकृतिक संपदा को संजोकर विकास की गाड़ी को आगे बढ़ाना है। हम जर्मनी, जापान, कनाडा एवं ऑस्ट्रेलिया आदि देशों से यह गुर सीख सकते हैं कि कैसे पर्यावरण और विकास दोनों को साथ-साथ आगे बढ़ाया जा सकता हैं। इससे सीख लेकर ही चीन भी अब इसी राह पर आगे बढ़ रहा है। अब यह हम पर है कि इस चुनौती को स्वीकार करते हैं या इससे घबराकर निगराहे फेरने को ही अपनी उन्नति मानते हैं।

इकोनॉमिक सर्वे 2018


  • मौसम की मार कर सकती है किसानों की आय 25 प्रतिशत तक कम 
  • पशुधन से होने वाली आय में 15-18 फीसदी की कमी 


मौसम के रहमो कर्म के लिए बार-बार आसमान की ओर ताकने वाले किसान के अरमानों पर इस बार फिर से मौसम की मार पड़ सकती है। ऐसा हमारा कहना नहीं है कि यह बात सामने आई है इकोनॉमि‍क सर्वे 2017-18 में। सरकार द्वारा 29 जनवरी 2018 को संसद के बजट सत्र के पहले दिन इकोनॉमि‍क सर्वे पेश किया गया। इस बार इकोनॉमि‍क सर्वे में कृषि पर विशेष अध्याय रखा गया है, जोकि पि‍छली बार नहीं था। सर्वे में चेतावनी देते हुए कहा गया है कि जलवायु परि‍वर्तन से मध्‍यावधि में फार्म इनकम 20-25 प्रतिशत तक कम हो सकती है। 

सर्वे में आगे कहा गया है कि वर्ष 2017-18 में एग्रीकल्‍चर सेक्‍टर की ग्रोथ 2.1 प्रतिशत रह सकती है। यह वर्ष 2016-17 की वृद्धि से 2.8 प्रतिशत कम है। पि‍छली बार कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर 4.9 फीसदी रही थी। 22 सि‍तंबर 2017 को जारी हुए फर्स्‍ट एडवांस एस्‍टीमेट के अनुसार, इस बार खरीफ फसल उत्पादन 13.47 करोड़ टन रहने का अंदेशा है। यह 2016-17 की तुलना में 39 लाख टन कम है। वर्ष 2016-17 में खरीफ उत्पादन 13.85 करोड़ टन था। किसानों के लिए जारी अनेक स्‍कीमों में लोन के ब्‍याज में राहत हेतु 20339 करोड़ रुपए स्वीकृत कि‍ए गए हैं। इस बार सस्‍ता संस्‍थागत ऋण मिलने से कि‍सान उधारी के लिए गैर संस्‍थागत स्रोतों से उधार नहीं लेंगे, जहां उन्‍हें भारी ब्‍याज चुकाना पड़ता है।

बिगड़ती स्थि‍ति पर काबू पाने के लिए सिंचाई सुवि‍धाओं में ‘नाटकीय’ ढंग से इजाफा करना चाहि‍ए। जहां तक सरकार की बात है तो कि‍सानों की आय को दुगुना करने हेतु पहले से ही मजबूती से सिंचाई की व्‍यवस्था दुरुस्‍त करने सहित जरूरी कदम उठाएं जा रहे हैं और उनकी सफलता का आंकलन करने पर भी बल दि‍या जा रहा है।

आर्थिक सर्वेक्षण बताता है कि कि‍सानों की आय बढ़ाने और एग्रीकल्‍चर सेक्‍टर में सुधार हेतु जीएसटी काउंसि‍ल की तर्ज पर ही एक तंत्र बनाया जाए। चूंकि मौसम की मार का प्रभाव भारतीय कृषि पर पड़ना आरंभ हो चुका है, जिससे मि‍ड टर्म में फार्म इनकम पर 20-25 प्रतिशत तक असर पड़ सकता है।

प्रकृति के प्रभाव से पशुधन क्षेत्र भी अछूता नहीं रहेगा। इस क्षेत्र में भी पशुधन से होने वाली आय में 15 -18 प्रतिशत की कमी हो सकती है। कृषि की वर्तमान आय को देखें को एक औसत कि‍सान को इससे लगभग 3600/- रुपए का नुकसान हो सकता है।

आज केवल 45- 50 प्रतिशत खेतों तक ही सिंचाई सुवि‍धा है, बाकी कृषि मानसून का जुआ बनी हुई है। कर्नाटक, महाराष्‍ट्र, मध्‍य प्रदेश, राजस्‍थान, छत्‍तीसगढ़ और झारखंड के अनेक क्षेत्रों में मौसम की मार सबसे ज्यादा पड़ी है। ऐसे में, जरूरी हो जाता है कि प्राकृतिक मार और घटते मौजूदा जलस्‍तर के मद्देनजर सिंचाई सुवि‍धा का वि‍स्‍तार किया जाए। मोर क्रॉप फॉर एव्री ड्रॉप के अंतर्गत ड्रि‍प सिंचाई, स्प्रिंक्‍लर्स और जल प्रबंधन आज भारतीय कृषि की आवश्यकता बन गया है, जिसे प्राथमि‍कता देनी होगी।

सर्वेक्षण में कहा गया है कि पहले की तुलना में आज कि‍सान तेजी से मशीनों को अपना रहे हैं। ट्रैक्‍टर की खरीद में निरंतर हुई वृद्धि इसका प्रमाण है। यही कारण है कि भारतीय ट्रैक्‍टर इंडस्‍ट्री विश्व का सबसे बड़ा उद्योग बन गया है। संसार में बनने वाले ट्रैक्‍टरों का एक ति‍हाई भारत में उत्‍पादन होता है। सर्वेक्षण के अनुसार, रबी फसलों की बुवाई सामान्‍य ढंग से चल रही है। वर्तमान आंकड़ों की बात करें तो 19 जनवरी 2018 तक 617.8 लाख हेक्‍टेयर क्षेत्र में रबी फसलों की बुआई हुई है। यह सामान्‍य का 98 फीसदी है।

इससे पूर्व महामहिम राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपने अभि‍भाषण में कृषि क्षेत्र में सरकार की उपलब्‍धि‍यां गि‍नाईं। उन्होंने कहा कि भारत के 82 प्रतिशत गांव अब सड़कों से जुड़ चुके हैं। सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2019 तक सभी गांवों को सड़कों से जोड़ा जाए। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत 5.71 करोड़ कि‍सानों को शामिल कि‍या गया है। उन्होंने आगे कहा कि 2022 तक कि‍सानों की आय को दुगुना करने के लि‍ए सरकार प्रति‍बद्ध है। भारत नेट के अंतर्गत 2,50,000 ग्राम पंचायतों को ब्रॉडबैंड कनेक्‍शन दि‍या जाएगा। मंडि‍यों को ऑनलाइन जोड़ने का कार्य प्रगति पर है। सरकार का लक्ष्य कि‍सानों की लागत कम करना है।

आज का विचार 

इज्जत और तारीफ मांगी नही जाती बल्कि कमाई जाती है। नेत्र केवल दृष्टि प्रदान करते है, परंतु हम कहाँ क्या देखते है, यह हमारे मन की भावना पर निर्भर है। 

रविवार, 28 जनवरी 2018

आज का विचार 

खुद से बहस करोगे तो सारे सवालों के जवाब मिल जाएंगे,
अगर दूसरो से करोगे तो और नये सवाल खड़े हो जायेंगे।
मनुष्य जब अपनी ग़लती का वक़ील और दूसरों की गलतियों,
का जज बन जाता है तो फैसले नही फासले हो जाते है।

शुक्रवार, 26 जनवरी 2018


आज का विचार 


बड़प्‍पन वह गुण है,
जो पद से नहीं संस्‍कारों से प्राप्‍त होता है


बुधवार, 24 जनवरी 2018

आज का विचार 

स्नान तन को, ध्यान मन को, दान धन को, योग जीवन को, प्रार्थना आत्मा को, 
व्रत स्वास्थ को, क्षमा रिश्तो को और परोपकार किस्मत को शुद्ध कर देता है।